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नवरात्रि कब है 2023 में ? कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त? नवरात्रि नौ दिनों का मुहूर्त ? दशहरा कब है ?

 शारदीय नवरात्रि का महत्व:

शारदीय नवरात्रि हिन्दू पर्वों में से एक है, जो मां दुर्गा की पूजा और महायज्ञ के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व आश्विन मास के पहले दिन से आठ दिन तक मनाया जाता है और इसका महत्व भगवान दुर्गा के आगमन के रूप में माना जाता है। इस पर्व के दौरान, मां दुर्गा की पूजा के साथ-साथ नौ रूपों की पूजा भी की जाती है, जिन्हें नवदुर्गा के रूप में जाना जाता है।

नवरात्रि के आठ दिनों के अर्थ:



प्रथम दिन (शैलपुत्री पूजा): नवरात्रि की शुरुआत देवी शैलपुत्री की पूजा के साथ होती है, जो मां पार्वती के रूप में मानी जाती है।

दूसरा दिन (ब्रह्मचारिणी पूजा): इस दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है, जो मां उसके तपस्या और साधना के रूप में मानी जाती हैं।

तीसरा दिन (चंद्रघंटा पूजा): इस दिन देवी चंद्रघंटा की पूजा की जाती है, जो मां की विजय के प्रतीक के रूप में मानी जाती हैं।

चौथा दिन (कुष्माण्डा पूजा): इस दिन देवी कुष्माण्डा की पूजा की जाती है, जो मां की जीवन की शक्ति के प्रतीक के रूप में मानी जाती हैं।

पांचवा दिन (स्कंदमाता पूजा): इस दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है, जो मां के बच्चे कार्तिकेय की मां के रूप में मानी जाती हैं।

छठा दिन (कात्यायनी पूजा): इस दिन देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है, जो मां के रूप में भगवान विष्णु की विशेष आवतार मानी जाती हैं।

सातवां दिन (कालरात्रि पूजा): इस दिन देवी कालरात्रि की पूजा की जाती है, जो मां के रूप में बहुत ही उग्र और शक्तिशाली होती हैं।

आठवां दिन (महागौरी पूजा): इस दिन देवी महागौरी की पूजा की जाती है, जो मां की शुद्धि और पवित्रता के प्रतीक के रूप में मानी जाती हैं।

नौवां दिन (सिद्धिदात्री पूजा): नवरात्रि का अंत देवी सिद्धिदात्री की पूजा के साथ होता है, जो मां की सिद्धियों के प्रतीक के रूप में मानी जाती हैं।


दशहरा, जिसे दुर्गा पूजा के बाद मनाया जाता है, भारत में मनाये जाने वाले महत्वपूर्ण हिन्दू त्योहारों में से एक है। इसे अनेक प्रकार से नामित किया जाता है, जैसे कि विजयादशमी और दशहरा। यह पर्व दुर्गा पूजा के आठवें दिन को मनाया जाता है और इसका महत्व विजय का प्रतीक होता है।
दशहरा के महत्वपूर्ण पहलू:
रावण वध: दशहरा का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है रावण वध का, जिसे भगवान राम ने लंका के राजा रावण को मारकर किया था। इस दिन, रामलीला नामक ड्रामा का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान राम की कहानी का नाटक प्रस्तुत किया जाता है।

देवी दुर्गा का विसर्जन: दुर्गा पूजा के पांच दिनों के पर्व के बाद, मां दुर्गा की मूर्तियों का विसर्जन दशहरा के दिन किया जाता है। यह पर्व भक्तों के लिए मां दुर्गा के विदाय का समय होता है।

शस्त्र पूजा: दशहरा के दिन, शस्त्र पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न प्रकार के आयुधों और यंत्रों की पूजा की जाती है। इसका मक्सद है शस्त्रों की सुरक्षा और उनका उपयोग सद्गुणों के साथ करने की प्रेरणा देना।

समाजिक मेलजोल: दशहरा के दिन, लोग अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर खुशियों का आयोजन करते हैं। विशेष रूप से बच्चे खिलौने के युद्ध करते हैं और सामाजिक खेल और मनोरंजन का आनंद लेते हैं।

धर्मिक आयोजन: दशहरा के दिन, मंदिरों और पूजा स्थलों में विशेष पूजा और आरती का आयोजन किया जाता है। लोग धार्मिक त्योहार के अवसर पर देवी दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

इस रूप में, दशहरा भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण त्योहार है जो विजय की प्रतीक है और लोगों को धर्मिक और सामाजिक आदर्शों की प्रेरणा देता है।
                                                  रावण वध



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